उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर – राजनैतिक तह में विस्मय
भारत के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफ़ा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है, और सरकार से लेकर विपक्ष तक सभी दलों के बीच माहौल गर्म है।
इस्तीफे के पीछे की पृष्ठभूमि
जगदीप धनखड़, जो कि उप-राष्ट्रपति होने के साथ-साथ राज्यसभा के सभापति भी थे, हाल के दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहसों का केंद्र बने हुए थे। उनके द्वारा विपक्षी सांसदों को बार-बार टोकना और कुछ सदस्यों को सस्पेंड करने के फैसले को लेकर कांग्रेस और अन्य दलों ने तीखी आपत्ति जताई थी।
बताया जा रहा है कि विपक्ष की ओर से उन पर ‘सरकार का पक्ष लेने’ का आरोप लगाया जा रहा था। कुछ जानकारों का मानना है कि इस्तीफे के पीछे यही विवाद मुख्य कारण हो सकता है।
अब आगे क्या? उप-राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
उप-राष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष प्रक्रिया के तहत होता है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत संचालित किया जाता है।
इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। यह चुनाव गोपनीय बैलट वोटिंग के माध्यम से होता है और प्रो-पोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम लागू होता है।
मतदाता कौन होते हैं?
केवल संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा + लोकसभा) के सदस्य ही उप-राष्ट्रपति के चुनाव में वोट डालते हैं।
नामांकन और स्क्रूटनी:
नामांकन भरने के बाद उसकी जांच होती है। यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन वैध पाया जाता है, तो वह चुनाव लड़ सकता है।
मतगणना और परिणाम:
वोटों की गिनती के बाद बहुमत पाने वाले उम्मीदवार को उप-राष्ट्रपति घोषित किया जाता है।
संभावित दावेदार
अब जब पद खाली हो चुका है, तो सभी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। बीजेपी की ओर से कोई वरिष्ठ नेता सामने आ सकता है, जबकि विपक्ष भी साझा उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश कर सकता है। इसमें क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अहम होगी।
निष्कर्ष
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह संसद में बढ़ती राजनीतिक असहिष्णुता और पक्षपात के आरोपों की गूंज भी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई नियुक्ति को लेकर राजनीतिक समीकरण कैसे बनते हैं और संसद की गरिमा कैसे बहाल की जाती है।
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